सोशल मीडिया फेम या वीआईपी दिखने की होड़, पुलिस अधिकारियों की साख पर सवाल


वलसाड़ | डेयर टू शेयर रिपोर्ट
वलसाड़ जिले समेत कई स्थानों पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ फोटो खिंचवाने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। चाहे पुलिस स्टेशन में किसी अफसर की नई पोस्टिंग हो, बर्थडे सेलिब्रेशन हो, या किसी एनजीओ प्रतिनिधि की मुलाकात, फोटो सेशन अब एक आम चलन बन चुका है।
इस फोटो संस्कृति का उपयोग आमतौर पर लोग खुद को विशेष और प्रभावशाली साबित करने के लिए करते हैं। ये तस्वीरें अक्सर व्हाट्सएप स्टेटस और सोशल मीडिया पर शेयर की जाती हैं, ताकि समाज में वीआईपी छवि बनाई जा सके।
पुलिस अधिकारियों के साथ फोटो खिंचवाने का बढ़ता चलन अब समाज में गंभीर समस्याओं को जन्म दे रहा है। यह ट्रेंड केवल दिखावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दुरुपयोग वीआईपी छवि बनाने, डर पैदा करने, और यहां तक कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए हो रहा है।
पुलिस का काम जनता की सेवा और सुरक्षा करना है, लेकिन हालात ऐसे बन रहे हैं कि पुलिस अधिकारी खुद सोशल मीडिया की चमक-दमक और छोटे उपहारों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
पुलिस और समाज पर इसके प्रभाव
- पुलिस की साख पर सवाल:
पुलिस जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होती है। लेकिन जब आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोग या स्वार्थी तत्व पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, तो यह संस्था की साख को नुकसान पहुंचाता है। - सामाजिक असंतुलन:
इन तस्वीरों का उपयोग कई बार आम लोगों को डराने और व्यक्तिगत फायदे के लिए किया जाता है। तस्वीरें दिखाकर लोग खुद को प्रभावशाली साबित करते हैं और अपने अवैध कामों के लिए पुलिस के नाम का दुरुपयोग करते हैं। - अपराधियों को बढ़ावा:
हाल ही में सूरत में एनडीपीएस (ड्रग्स और मादक पदार्थ) के मामले में पकड़े गए कुछ आरोपियों की पुलिस अधिकारियों और नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं। इससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
फोटो संस्कृति के नकारात्मक प्रभाव
- अपराधियों को प्रोत्साहन:
हाल के मामलों में देखा गया है कि कई अपराधियों ने पुलिस अधिकारियों के साथ खिंचवाई तस्वीरों का इस्तेमाल अपनी साख बढ़ाने और पुलिस का डर खत्म करने के लिए किया है।
उदाहरण: सूरत में एनडीपीएस मामले में पकड़े गए आरोपियों के कई फोटो पुलिस अधिकारियों और नेताओं के साथ सामने आए। यह साफ दिखाता है कि अपराधी इन तस्वीरों का उपयोग अपनी गतिविधियों को छुपाने और वैधता साबित करने के लिए कर रहे हैं।
- पुलिस की साख पर दाग:
एक अनुशासित और निष्पक्ष संस्था मानी जाने वाली पुलिस जब हर किसी के साथ फोटो खिंचवाने के लिए तैयार हो जाती है, तो इसकी गरिमा और निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। - जनता में भय और असुरक्षा:
इन तस्वीरों का इस्तेमाल अक्सर आम लोगों को डराने और उनके खिलाफ दबाव बनाने के लिए किया जाता है। यह पुलिस और जनता के रिश्ते में अविश्वास पैदा करता है। - पुलिस की प्राथमिकता का नुकसान:
अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की बजाय, जब पुलिस अधिकारी फोटो खिंचवाने में समय बर्बाद करते हैं, तो यह उनके कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
पुलिस का क्या कर्तव्य है? फोटो खिंचवाने पर रोक:
पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि वे बिना किसी ठोस कारण के लोगों के साथ फोटो खिंचवाने से बचें। सख्त गाइडलाइंस:
पुलिस विभाग को इस चलन पर सख्त पाबंदी लगानी चाहिए और ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह से रोकना चाहिए। अपराधियों से दूरी बनाए रखना:
यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस की छवि का इस्तेमाल अपराधी अपने फायदे के लिए न कर सकें। क्यों है यह चलन खतरनाक? वीआईपी गिरी का दिखावा:
पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें खिंचवाकर लोग अपने आप को आम जनता से अलग और प्रभावशाली साबित करना चाहते हैं।
सामाजिक असमानता:
इस तरह की तस्वीरें समाज में असमानता और असुरक्षा को बढ़ावा देती हैं।समाज के लिए संदेश
पुलिस और जनता के बीच भरोसा और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यह फोटो खिंचवाने का जुनून केवल दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे के मकसद खतरनाक और कानून के खिलाफ हो सकते हैं।
डेयर टू शेयर की चेतावनी
अगर इस फोटो संस्कृति पर जल्द ही रोक नहीं लगाई गई, तो यह समाज और पुलिस व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस को अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए इस ट्रेंड को खत्म करना होगा।
क्या आप भी इस फोटो संस्कृति से परेशान हैं? अपनी राय हमारे साथ साझा करें।








