“सौभाग्य इन होटल का ‘कॉकरोच कांड’ – सच्चाई या सौदेबाजी?”

सिलवासा: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक खबर तेजी से वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि सिलवासा के सौभाग्य इन होटल की बिरयानी में कॉकरोच मिला। यह खबर आग की तरह फैली, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ समय बाद यह खबर डिलीट कर दी गई।

इसके तुरंत बाद होटल प्रबंधन ने एक वीडियो जारी कर इस खबर को झूठा बताया और चेतावनी दी कि झूठी खबरें फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल यह है कि न तो होटल ने कानूनी कार्रवाई की और न ही प्रशासन ने जांच की।

अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह खबर सच थी, या फिर पैसों के दम पर इसे दबा दिया गया?


फूड विभाग की चुप्पी – माजरा क्या है?

यह पहली बार नहीं है जब किसी होटल या मिठाई की दुकान से इस तरह की गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। कुछ समय पहले एक मिठाई की दुकान पर भी इसी तरह का विवाद हुआ था, लेकिन तब भी फूड विभाग पूरी तरह मौन रहा।

अगर सिलवासा के छोटे-बड़े होटलों की हकीकत जांची जाए, तो हालत बेहद खराब मिलेगी:
खराब क्वालिटी का खाना परोसा जाता है।
✅ किचन और स्टोरेज एरिया की साफ-सफाई नहीं होती।
✅ पेस्ट कंट्रोल महीनों तक नहीं किया जाता।
✅ खाने और पानी के सैंपल टेस्ट नहीं किए जाते।
✅ कर्मचारियों की हाइजीन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

अगर फूड विभाग सिलवासा के होटलों का औचक निरीक्षण करे, तो 95% होटल और रेस्टोरेंट फेल साबित होंगे।


क्या फूड विभाग सिर्फ ‘नाम का विभाग’ बनकर रह गया है?

भारत में FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के कड़े नियम हैं, जिनका पालन हर होटल और रेस्टोरेंट को करना चाहिए:
1️⃣ FSSAI लाइसेंस अनिवार्य है।
2️⃣ खाने और पानी के नियमित सैंपल टेस्ट होने चाहिए।
3️⃣ किचन और कर्मचारियों की साफ-सफाई बनी रहनी चाहिए।
4️⃣ हर होटल में पेस्ट कंट्रोल नियमित रूप से कराया जाना चाहिए।
5️⃣ सरकारी निरीक्षण और रिपोर्टिंग अनिवार्य होनी चाहिए।

पर जब प्रशासन ही चुप बैठा हो, तो नियमों का पालन कौन करेगा?

पत्रकारिता या पैसों की सौदेबाजी?

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर खबर सच थी, तो उसे डिलीट क्यों किया गया?
अगर खबर झूठी थी, तो प्रशासन ने जांच कर जनता को सही जानकारी क्यों नहीं दी?
क्या अब पत्रकारिता भी पैसों की सौदेबाजी का हिस्सा बन चुकी है?

जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कब तक चलेगा?

फूड विभाग को चाहिए कि वह तुरंत सिलवासा के सभी होटलों और रेस्टोरेंट्स का औचक निरीक्षण करे और इस मामले की सच्चाई उजागर करे। वरना ऐसा ही होता रहेगा – पहले खबरें चलेंगी, फिर पैसों के दम पर डिलीट होंगी, और जनता अंधेरे में रहेगी!

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