बिना लाइसेंस और साफ-सफाई के चल रहे थे ढ़ाबे, शराब भी परोसी जा रही थी खुलेआम
फूड विभाग की तत्परता से हुआ खुलासा, आबकारी विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल


सिलवासा
सामरवरणी में अवैध रूप से चल रहे दो ढ़ाबों पर जब फूड विभाग की टीम ने छापा मारा, तो वहाँ से 6 पेटियों से अधिक अंग्रेजी शराब और बियर बरामद की गई। यह कार्यवाही इम्प्रेस मॉल के पीछे की गली में स्थित जगदीश पटेल और कुणाल पटेल के ढाबों पर की गई, जहां बिना किसी लाइसेंस के खुलेआम शराब परोसी जा रही थी।

खाद्य विभाग की जांच में यह साफ हुआ कि दोनों ढाबों के पास कोई भी वैध फूड या एक्साइज लाइसेंस नहीं है। इन ढाबों में गंदगी का अंबार था, और ऐसी अस्वच्छ जगहों पर ग्राहकों को भोजन और शराब परोसा जा रहा था। विभाग के अधिकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि लाइसेंस के बिना कोई भी खाद्य प्रतिष्ठान संचालित नहीं किया जा सकता, और अस्वस्थ माहौल में खाना-पीना लोगों की सेहत के लिए खतरा है।
फूड विभाग का एक्शन काबिले-तारीफ
फूड विभाग ने न केवल अवैध खानपान पर कार्रवाई की बल्कि जब मौके पर शराब पाई गई तो तत्परता से आबकारी विभाग को सूचित भी किया। विभाग की सक्रियता और जवाबदेही ने यह साबित किया कि अगर प्रशासन चाहे तो अवैध गतिविधियों पर लगाम लग सकती है।
अब सवाल आबकारी विभाग से
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जब दो ढाबों से शराब-बियर मिली तो यह भी उजागर हुआ कि एक्साइज लाइसेंस तक नहीं थे। तो फिर आबकारी विभाग आखिर करता क्या है? क्या वह स्वयं कभी किसी अवैध स्थल पर रेड करता है या केवल सूचना मिलने पर पहुंचता है?
इतना ही नहीं, जब भी आबकारी विभाग छापा मारता है, तो मीडिया को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। न तो प्रेस को सूचना दी जाती है और न ही रेड की सच्चाई उजागर होती है। यह एक प्रकार की गोपनीयता नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व से बचाव की रणनीति प्रतीत होती है।
दादरा चेकपोस्ट के आस पास के रेस्टोरेंट और ढाबों की अब होनी चाहिए पूरी जांच
दादरा और सिलवासा में कई ऐसे रेस्टोरेंट और ढाबे खुलेआम चल रहे हैं जहां न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है और न ही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच होती है। अब फूड विभाग को चाहिए कि वह रेस्टोरेंट्स और बड़े होटलों की भी जांच शुरू करे। कई जगहों पर ग्राहकों को महंगी कीमतों में घटिया और बासी खाना परोसा जा रहा है। कुछ प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल हो रहे तेल और मसालों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है।
अगर फूड विभाग इसी तरह सक्रिय रहा, तो निश्चित ही आने वाले समय में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर लगाम लगेगी। लेकिन आबकारी विभाग की निष्क्रियता न केवल चिंताजनक है, बल्कि आम जनता के मन में अविश्वास भी पैदा करती है।
अब ज़रूरत है समन्वय की, जहां खाद्य विभाग और आबकारी विभाग मिलकर ईमानदारी से कार्य करें, ना कि केवल कार्रवाई की खानापूर्ति। वरना अवैध ढाबों और रेस्टोरेंटों के सहारे सेहत और कानून दोनों ही खतरे में रहेंगे।











