जीपीसीबी को झूठे वीडियो से गुमराह कर रहे कथित पत्रकार, केमिकल कंपनी से वसूले ₹15,000″
जेल भेजने और कंपनी बंद कराने की धमकी देकर पैसे ऐंठे, कई और कंपनियां बनीं निशाना?
वापी में सक्रिय ‘मीडिया माफिया’ बेनकाब! – FIR में गंभीर आरोप, सभी आरोपी वांटेड घोषित”
पुलिस करेगी परेड और रिकंस्ट्रक्शन, रिमांड में खुल सकते हैं दो और पत्रकारों के नाम
₹60,000 की खंडनी वसूली और झूठी शिकायत का बड़ा खुलासा – कथित यूट्यूबर-पत्रकार गैंग के खिलाफ केस दर्ज, कई कंपनियों से अवैध वसूली की आशंका



वापी | रिपोर्ट : मनोज रावल
वापी GIDC की एक प्रतिष्ठित केमिकल यूनिट से ₹60,000 की खंडनी मांगने वाले चार कथित यूट्यूबर-पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि इन कथित पत्रकारों ने कंपनी के बाहर भरे वर्षा के गंदे पानी का वीडियो बनाकर जीपीसीबी में झूठी शिकायत की और जेल भेजने, कंपनी बंद कराने की धमकी देकर व्यवसायी से ₹15,000 की अवैध वसूली की।
एफआईआर में जिन नामों का उल्लेख है, वे हैं:
- मेरुभाई हमीरभाई गढ़वी – मो. 9727535301
- जितेन्द्र किशोरभाई वाडवेकर – मो. 9316164094
- अवनीशभाई – पूरा नाम अज्ञात
- आलमभाई – पूरा नाम अज्ञात
- दो अन्य अज्ञात आरोपी



शिकायतकर्ता राजकुमार कार्तिकेय भेरैया (49), जो वापी GIDC में POLYSPERSE CHEMICAL नामक डाई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चलाते हैं, ने पुलिस में दर्ज बयान में कहा कि 21 जून 2025 को चारों आरोपियों ने उनकी कंपनी के सामने बारिश के पानी का वीडियो बनाकर झूठे आरोप लगाए कि यह केमिकलयुक्त प्रदूषित पानी है। अगले ही दिन उन्होंने कंपनी में घुसकर धमकी दी कि यदि ₹60,000 नहीं दिए तो वे वीडियो मीडिया में वायरल कर देंगे और जीपीसीबी में शिकायत कर कंपनी बंद करवा देंगे।
जब व्यवसायी ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपियों ने ₹15,000 जबरन वसूले – जिसमें ₹7,500-₹7,500 की ट्रांजेक्शन मेरुभाई और जितेन्द्रभाई के UPI खातों में भेजे गए।
अपराध की शैली चिंताजनक, कई और केस खुलने की आशंका
सूत्रों के अनुसार, इन कथित पत्रकारों का यह कोई पहला मामला नहीं है। पुलिस को शक है कि इन्होंने बारिश के मौसम का फायदा उठाकर वापी की अन्य कई कंपनियों से भी इसी प्रकार ‘तोड़ पानी’ (ब्लैकमेलिंग) की है। आने वाले दिनों में कई और FIR दर्ज होने की संभावना है।
पुलिस ने मामला BNS 308(6), 308(7), 54 के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सभी आरोपी फिलहाल वांटेड घोषित किए गए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि:
जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर उनकी परेड करवाई जाएगी।
घटनास्थल पर रिकंस्ट्रक्शन (पुनरावृत्ति) कराया जाएगा।
पुलिस रिमांड लेकर दो अन्य कथित पत्रकारों के नाम भी उजागर किए जा सकते हैं।
यह मामला वापी इंडस्ट्रियल ज़ोन में पत्रकारिता की आड़ में चल रहे कथित ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट को उजागर करता है। यदि जांच में पुष्टि होती है, तो यह सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं, बल्कि व्यवस्थित ‘मीडिया माफिया’ की साजिश हो सकती है।
“पत्रकार या अपराधी?” – समाज में गूंजता सवाल
वापी-वलसाड क्षेत्र में इस घटना को लेकर व्यापारिक संगठनों और औद्योगिक संस्थानों में रोष है। जीपीसीबी और पुलिस को मिले वीडियो और UPI ट्रांजेक्शनों से जांच को और बल मिल रहा है।
पुलिस अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि यह मामला गंभीर है और “पत्रकारिता की आड़ में चल रहे एक संगठित अपराध” का संकेत देता है।
वापी पुलिस ने FIR दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। मामले में कोई गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है, लेकिन जल्द कार्रवाई के संकेत हैं। उद्योगपतियों से अपील है कि यदि किसी ने भी इन कथित पत्रकारों द्वारा ब्लैकमेलिंग का सामना किया है तो वह आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं।
Note: यह रिपोर्ट प्राथमिक शिकायत पर आधारित है। पुलिस जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। किसी भी आरोपी को कानूनन दोषी तभी माना जाएगा जब अदालत उसे दोषी ठहराए।
बीएनएस (BNS) की धारा 308(6) क्या है?
बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 308(6) मुख्य रूप से “जबरन वसूली” (Extortion) से संबंधित है। इसमें वह स्थिति शामिल होती है, जब कोई व्यक्ति जबरन वसूली के इरादे से किसी अन्य व्यक्ति को या उसके संबंधी को गंभीर अपराध (जैसे कि मृत्यु दण्ड, आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद वाले अपराध) में फंसाने या आरोप लगाने की धमकी देता है।
धारा 308(6) की सजा
सजा:10 वर्ष तक की सख्त/साधारण कारावास और जुर्माना।
प्रक्रिया: यह अपराध गैर-जमानती (Non-bailable) है और पुलिस द्वारा सीधे गिरफ्तार किया जा सकता है (Cognizable)। इसका ट्रायल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट द्वारा होता है
बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 308(7)
यह धारा तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति इस आधार पर जबरन वसूली करता है कि वह किसी अन्य व्यक्ति पर अत्यंत गंभीर अपराध (जैसे मृत्यु, आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा से दंडनीय अपराध) करने या करवाने का झूठा आरोप लगाने की धमकी देता है, या किसी को ऐसा अपराध करने के लिये उकसाता है
सजा का प्रावधान:
बीएनएस धारा 308(7) के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर दोषी व्यक्ति को:
-10 वर्ष तक की कारावास (सजायोग्य)
- जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं
ध्यान दें - यह अपराध संज्ञेय (गंभीर) और गैर-जमानती माना जाता है।
- पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है।









