एलडीसी भर्ती 2019 पर धूल जम गई, बेरोजगारों की आंखों में आंसू और सिस्टम चुप है

सिलवासा | डेयर टू शेयर (रिपोर्ट)
दादरा नगर हवेली और दमन-दीव में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया का जो हाल है, वह किसी मज़ाक से कम नहीं। 2019 में निकली लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) की भर्ती आज तक अधूरी है – न परीक्षा हुई, न इंटरव्यू, न नियुक्ति। 5 साल से युवा इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन पूरी तरह से खामोश है।

क्या यही है “गुड गवर्नेंस”?
11 दिसंबर 2019 को दानह में 34 पदों और 24 जनवरी 2020 को दमन-दीव में 46 पदों के लिए अधिसूचना जारी हुई थी। लेकिन न कोई परीक्षा हुई और न ही कोई जानकारी दी गई कि भर्ती रुकी क्यों है।
भर्ती नहीं, धोखा निकली अधिसूचना?
हज़ारों युवाओं ने फीस भरी, तैयारी की, और अपने भविष्य की उम्मीदें इस भर्ती से जोड़ीं। लेकिन आज तक कोई एक्शन नहीं, जिससे साफ है कि प्रशासन की नज़र में बेरोजगारों की कोई अहमियत नहीं है।
उम्र निकल गई, सिस्टम हिला नहीं
कई उम्मीदवार अब आयुसीमा पार कर चुके हैं – यानी अब उनके पास दोबारा मौका नहीं। यह सिर्फ देरी नहीं, सपनों की हत्या है। युवाओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है, लेकिन सरकार कान में तेल डाले बैठी है।

जॉब फेयर का दिखावा, भर्ती का सन्नाटा
प्रशासन जॉब फेयर के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रहा है, लेकिन पुरानी भर्तियां अधूरी छोड़ देना इस बात का सबूत है कि यह सिस्टम सिर्फ प्रचार का भूखा है, समाधान का नहीं।
सरकार से सवाल–
5 साल से प्रक्रिया अधूरी क्यों है?
क्या युवाओं के साथ किया गया ये मज़ाक नहीं है?
क्या आयुसीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा?
डेयर टू शेयर की यह रिपोर्ट सरकार और प्रशासन से सीधा सवाल पूछती है:
“भर्ती प्रक्रिया में 5 साल की देरी – क्या ये लापरवाही नहीं, अपराध है?”
अब वक्त है कि अधिकारी जवाब दें, जिम्मेदारी तय हो और युवाओं को उनका हक मिले।







