आईटी एक्ट व भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत FIR की मांग; WhatsApp ग्रुप Admin की भूमिका भी संदेह के घेरे में ?


सिलवासा, 30 जून
शिवसेना (UBT) के दादरा नगर हवेली व दमन दीव इकाई के अध्यक्ष, बसेरा को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के प्रमुख एवं पंचमुखी हनुमान मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री स्वेतल रमनलाल भट्ट ने सोशल मीडिया पर झूठे और मानहानिकारक संदेश प्रसारित करने वाले अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस बाबत पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है।

श्री भट्ट ने बताया कि 29 जून 2025 की रात लगभग 11:00 बजे उन्हें WhatsApp समूह “MANDIR FALIYA” एवं “Only BASERA SOCIETY” में एक झूठा, भ्रामक और अपमानजनक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें उनके ऊपर एक नाबालिग लड़की को “I LOVE YOU” कहने का मनगढ़ंत आरोप लगाया गया है। यह संदेश उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने और उन्हें समाज में बदनाम करने के उद्देश्य से साझा किया गया।
शिकायत में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह आरोप न केवल आधारहीन है, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड में भी उनके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि यह झूठा प्रचार पूरी तरह से दुर्भावना से प्रेरित है और किसी साजिश या व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम हो सकता है।
प्रशासन से मांग की गई है कि
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
संदेश भेजने वाले का फोन नंबर, IP एड्रेस, IMEI नंबर व डिवाइस की पहचान की जाए।


WhatsApp समूहों के Admin को भी आईटी नियमों के तहत उत्तरदायी ठहराया जाए, क्योंकि ऐसे ग्रुप्स में झूठा संदेश प्रसारित कर उनकी छवि को गहरी क्षति पहुंचाई गई है।
WhatsApp को निर्देश दिया जाए कि वह संबंधित चैट लॉग, मेटाडेटा और प्रेषक की जानकारी संरक्षित रखे।
झूठे व अपमानजनक संदेश को हटाया जाए तथा इसे आगे बढ़ाने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
श्री भट्ट ने बताया कि इस अफवाह के कारण उन्हें, उनके परिवार और सहयोगियों को गहरी मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान और सार्वजनिक छवि को आघात का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि सोशल मीडिया के इस दुरुपयोग पर लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी निर्दोष को यूं ही बदनाम करने की हिमाकत न कर सके।
👉 संपादकीय टिप्पणी:
सोशल मीडिया आज संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है, लेकिन यदि इसका दुरुपयोग कर किसी की छवि बिगाड़ने या अफवाह फैलाने का माध्यम बनाया जाए, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। प्रशासन को इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।







