GNLU सिलवासा कैंपस में दो दिवसीय ओरिएंटेशन सत्र का शुभारंभ

न्याय के नवागंतुक विद्यार्थियों का सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों ने प्रेरणादायी शब्दों से किया स्वागत

सिलवासा, 26 जुलाई 2025:
गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) के सिलवासा कैंपस में आज अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लॉ प्रोग्राम के नए विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस अवसर पर देश के न्यायिक क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।

उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं GNLU के विज़िटर जस्टिस निलय अंजारिया, गुजरात हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति श्री इलेश जशवंतराय वोरा, श्री निरल मेहता, और श्री पी.एम. रावल ने विद्यार्थियों को प्रेरक संबोधन दिया।
संघ प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन और दीव के प्रशासक के सलाहकार श्री अमित सिंगला, IAS भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

GNLU के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. शांथाकुमार ने सभी विद्यार्थियों और अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि सिलवासा कैंपस, माननीय प्रशासक श्री प्रफुल पटेल के दूरदर्शी नेतृत्व और उनके मार्गदर्शन का प्रतिफल है। उन्होंने संघ प्रदेश प्रशासन के अधिकारियों का भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

अपने संबोधन में प्रो. शांथाकुमार ने कहा,

“CLAT जैसी देश की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रवेश परीक्षा को पास कर आप यहां तक पहुंचे हैं। लेकिन कानून का अध्ययन केवल नियमों का अध्ययन नहीं है, यह हमारे समाज की नींव को समझने और उसे बेहतर बनाने की यात्रा है।”

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे असफलताओं से न डरें और हर चुनौती को सीखने के अवसर के रूप में अपनाएं। “कानून न्याय और करुणा का मार्ग है,” उन्होंने कहा।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायमूर्तियों ने भी अपने प्रेरणादायक भाषणों में कानूनी क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए और विद्यार्थियों को एक सशक्त, नैतिक और संवेदनशील वकील बनने की प्रेरणा दी।

श्री अमित सिंगला ने छात्रों को संघ प्रदेश में स्वागत करते हुए कहा कि प्रशासन युवाओं के सशक्तिकरण और समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम का समापन GNLU के रजिस्ट्रार डॉ. नितिन मलिक द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

यह ओरिएंटेशन सत्र GNLU की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसके अंतर्गत वह ऐसे कानूनी पेशेवर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो न केवल ज्ञानवान हों, बल्कि नैतिक मूल्यों में आस्था रखने वाले और समाज के प्रति उत्तरदायी भी हों।

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