गाय माता को सड़क से मौत की ओर घसीटते ठेकेदार – जागी जनता, थमी बर्बरता

नृशंसता पर आक्रोश, अब वक्त है सख्त कानून और संवेदनशीलता का

वापी महानगरपालिका द्वारा अनुबंधित पशु पकड़ने वाली एक गाड़ी ने डाभेल चेकपोस्ट पर जो दृश्य रचा, वह न केवल अमानवीय था बल्कि नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

25 जुलाई की शाम, एक बिना नंबर प्लेट की गाड़ी टैक्टर (संभावित तौर पर रजिस्ट्रेशन और वैध लाइसेंस विहीन) शहर की सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं – गायों और नंदियों – को पकड़ने के नाम पर अत्यंत ही क्रूरता से व्यवहार करती नजर आई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, ठेकेदार की टीम ने गाय माता को रस्सी से गले में फंदा डालकर चलते ट्रैक्टर से घसीटते हुए गाड़ी पर चढ़ाने की कोशिश की। यह प्रक्रिया न केवल क्रूर थी, बल्कि पशु की जान के लिए अत्यंत खतरनाक भी थी। कई बार तो दम घुटने की स्थिति में गाय गिर पड़ी और तड़पती रही।

इस वीभत्स दृश्य को देख जनता का आक्रोश फूट पड़ा। स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए और विरोध किया। भारी विरोध और नाराज़गी के चलते अंततः ठेकेदार को मजबूरन गाय को छोड़ना पड़ा।

नगरप्रशासन की लापरवाही और संवेदनशीलता का अभाव

यह पहली बार नहीं है जब नगरपालिका की ठेका गाड़ियाँ इस प्रकार की असंवेदनशीलता और नियमों की अनदेखी करती नजर आई हों। बिना रजिस्ट्रेशन, बिना प्रशिक्षित स्टाफ और बिना पशु कल्याण से जुड़ी मान्य प्रक्रिया के इस प्रकार का कार्य न केवल गैरकानूनी है, बल्कि धार्मिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी निंदनीय है। “गाय को माता कहने वाले समाज में, यदि यही व्यवहार हो, तो यह पाखंड की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या?”

❗ जनता और सामाजिक संस्थाओं के लिए अपील:

  1. स्थानीय सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे ऐसे ठेकेदारों को संवेदनशीलता और पशु कल्याण के प्रति प्रशिक्षण देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करें।
  2. पशु संरक्षण समूहों और NGO को आगे आकर नगरप्रशासन पर दबाव बनाना चाहिए कि ऐसे संवेदनहीन ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  3. स्थानीय पुलिस और आरटीओ विभाग को भी ऐसे वाहनों की जाँच अनिवार्य रूप से करनी चाहिए – विशेषकर यदि वे बिना नंबर प्लेट, बीमा या रजिस्ट्रेशन के चल रहे हों।

📣 सड़क पर बैठे जानवरों के मालिकों की जिम्मेदारी भी तय हो:

  1. सड़क पर छोड़ दिए गए पशु दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम का कारण बनते हैं।
  2. यह पशुओं की गलती नहीं, बल्कि उनके मालिकों की लापरवाही है।
  3. ऐसे मामलों में गौपालक मालिकों पर जुर्माना, पशुओं को छोड़ने के लिए कानूनी कार्यवाही और पुनर्वास के लिए जागरूकता जरूरी है।

✅ समाधान की दिशा में सुझाव:

नगर पालिका द्वारा ठेके पर कार्यरत कर्मियों को प्रॉपर ट्रेनिंग दी जाए जिसमें पशु को पकड़ने की मानवीय तकनीकें, विधिक दिशानिर्देश और धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताएँ समझाई जाएँ।

हर वाहन पर GPS, CCTV कैमरे और नंबर प्लेट अनिवार्य की जाए।

ठेकेदारों से पशु चिकित्सकों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए, विशेषकर घायल या बीमार जानवरों के केस में।

🗨 स्थानीय लोगों की मांग:

“गाय को इस तरह से घसीटना बर्दाश्त नहीं! अगर प्रशासन कार्रवाई नहीं करता, तो हम खुद सड़क पर उतरेंगे!” – एक स्थानीय नागरिक

डाभेल में जो दृश्य देखा गया, वह केवल एक घटना नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवेदना और प्रशासनिक लापरवाही का एक वीभत्स प्रतिबिंब है। अब समय है कि जनता, प्रशासन और सामाजिक संस्थाएँ मिलकर इस अमानवीय व्यवस्था को समाप्त करें और पशु कल्याण को प्राथमिकता दें।

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