‘आवास फाइनेंस लिमिटेड’ की बर्बर वसूली ने ली एक और जान, पर क्या दोषी पकड़े जाएंगे?

उमरगाम में पानीपुरी व्यापारी सागर रावल ने बैंक की अमानवीय वसूली पद्धति से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि बैंक के कर्मचारियों ने उसे लगातार धमकाया, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और गली-गली में बदनाम कर दिया, जिससे तंग आकर उसने जान दे दी।
शर्मनाक यह है कि पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बने बैठे हैं। परिवार ने वलसाड SP से मांग की है कि वे खुद इस मामले की जांच करें और बैंक के उन कर्मचारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए जिन्होंने सागर को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।

बैंक या अपराधी गैंग? आवास फाइनेंस की वसूली से बढ़ती आत्महत्याएँ!
RBI के नियमों के बावजूद बैंकें खुलेआम गुंडागर्दी कर रही हैं।
रिकवरी एजेंट कानून को ताक पर रखकर धमकाते हैं, गाली-गलौज करते हैं और सामाजिक तौर पर अपमानित करते हैं।
क्या बैंक अब कर्जदारों की जिंदगी छीनने के लिए खुले हैं?
परिवार का कहना है कि बैंक ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही धमकाना और प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। क्या किसी इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है?
पुलिस प्रशासन की नाकामी: दोषियों को कब मिलेगी सजा?
परिवार ने उमरगाम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक किसी भी बैंक अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस मामले की जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। क्या वाकई पुलिस किसी गरीब के लिए न्याय दिलाने को तैयार है?


मांग: हत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हो!
- बैंक के दोषी कर्मचारियों पर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) और 506 (धमकी देने) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए।
- बैंक की अवैध वसूली और गुंडागर्दी की उच्च स्तरीय जांच हो।
- सरकार ऐसे मामलों में बैंकों की मनमानी रोकने के लिए कड़े कानून लागू करे।
‘डेयर टू शेयर’ की कड़ी चेतावनी
अगर इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा नहीं दी गई तो ‘डेयर टू शेयर’ इस मुद्दे को जन आंदोलन बनाएगा। यह लड़ाई सिर्फ सागर रावल की नहीं है, बल्कि हर उस आम नागरिक की है, जो इन बैंकों की तानाशाही का शिकार हो रहा है। सरकार और प्रशासन जवाब दें – आखिर कब तक निर्दोष लोग मरते रहेंगे?






