

जर्जर पुल पर बच्चों की परेड, आदेश की खुलेआम अवहेलना 📌अधिकारी नदारद!

सिलवासा (सिल्ली) — दादरा नगर हवेली प्रशासन द्वारा स्पष्ट आदेश के बावजूद, अद्वैता गुरुकुल स्कूल के छात्रों को 14 जून की सुबह सिल्ली के खस्ताहाल पुल से गुजारते देखा गया। जिला प्रशासन ने 12 जून 2025 को एक स्पष्ट आदेश (ADM/LAW/139/1999/1096) जारी करते हुए दोनों पुलों को स्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया था, GIDC डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेज नवसारी की रिपोर्ट के आधार पर, जिसमें पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण की कोई संभावना नहीं जताई गई।


पर इसके बावजूद स्कूल संचालक ने न सिर्फ आदेश की अवहेलना की, बल्कि मासूम छात्रों की जान जोखिम में डाल दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
आदेश धरे के धरे रह गए, बच्चों की सुरक्षा से बड़ा क्या है स्कूल टाइम?
ब्रिज बंद, लेकिन आदेश के बावजूद स्कूल प्रशासन ने बेरीगेट हटाकर कराया बच्चों को पार
12 जून को प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से ब्रिज को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन 14 जून की सुबह अद्वैता गुरुकुल स्कूल के छात्रों और स्टाफ को वही जर्जर ब्रिज पार करते हुए देखा गया। सूत्रों के अनुसार, Federation of Industries Association की जिला कलेक्टर से मुलाकात के बाद 14 जून की शाम को एक संशोधित आदेश (ADM/LAW/139/1999/1106) जारी हुआ, जिसमें केवल “वाहनों की आवाजाही” पर प्रतिबंध था – जिससे भ्रम की स्थिति बन गई।
इस अस्पष्टता का फायदा उठाते हुए स्कूल संचालक ने बच्चों को फिर से ब्रिज पार कराना शुरू कर दिया। सवाल यह है कि जब पुल को “जर्जर और असुरक्षित” घोषित किया जा चुका है, तो उसमें इंसानी जान को गुजरने देना कैसे तर्कसंगत है?
क्या दमन की 2003 की घटना को भूल गया प्रशासन?
28 मासूमों की मौत से नहीं ली सीख? सिल्ली में फिर मंडरा रहा है वैसा ही खतरा
2003 में दमण में एक खस्ताहाल ब्रिज गिरने से 28 बच्चों की मौत हुई थी। हाल ही में पुणे में भी ब्रिज की जर्जर स्थिति के चलते कई जानें गईं। फिर भी दादरा नगर हवेली के सिल्ली में प्रशासन ने या तो आदेश स्पष्ट नहीं किया या उन्हें सख्ती से लागू नहीं करवाया।
क्या कोई बड़ी अनहोनी होने तक हम जागेंगे नहीं?
प्रश्न जो खड़े होते हैं:
क्या प्रशासन को स्कूल के समय में बदलाव कर घूमकर जाने के आदेश देने चाहिए थे?
क्या कुछ किलोमीटर का चक्कर और थोड़े से ईंधन से बचने के लिए बच्चों की जान दांव पर लगाई जा रही है?
क्या आदेश के उल्लंघन पर स्कूल संचालकों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
क्या अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता नहीं?
हादसे की जमीन तैयार हो रही है – जिम्मेदार कौन होगा?
दादरा की हालिया स्कूल दुर्घटना, जिसमें एक जर्जर इमारत गिरने से कई बच्चे घायल हुए थे, हमें आगाह कर चुकी है। अगर सिल्ली ब्रिज पर कोई अनहोनी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा — प्रशासन, स्कूल प्रबंधक, या मौन रहने वाले अभिभावक?
“एक आदेश ने ब्रिज को बंद किया, लेकिन लापरवाही ने उसे फिर से खोल दिया – यह दस्तक है मौत की।”
क्या आदेश सिर्फ कागजों में रह गया।
बच्चों की जान से खेल में, प्रशासन और स्कूल दोनों दोषी है








